हिंदू त्योहार · Akshaya Tritiya
अक्षय तृतीया
अगली तिथि रविवार, 9 मई 2027 · वैशाख शुक्ल तृतीया (sunrise)
| तिथि / समय | वैशाख शुक्ल तृतीया |
|---|---|
| देवता | विष्णु / लक्ष्मी |
| पालन | सोने की ख़रीद, दान |
| कहाँ | पूरे भारत में |
अक्षय तृतीया 2026 की तिथियाँ
- अक्षय तृतीया
- सोमवार, 20 अप्रैल 2026वैशाख शुक्ल तृतीया (sunrise)
स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।
अक्षय तृतीया — महत्व और कथा
अक्षय तृतीया वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। "अक्षय" का अर्थ है जो क्षय न हो, जो कभी समाप्त न हो। इसी भाव के साथ यह पर्व भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी को समर्पित है। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान, जप, स्नान और पुण्य-कार्य अक्षय फल देता है — अर्थात उसका पुण्य समाप्त नहीं होता।
परंपरा में इस तिथि को शुभ आरंभ का दिन माना जाता है। अनेक श्रद्धालु इस दिन नए कार्य का आरंभ, स्वर्ण क्रय और दान करते हैं। यह विश्वास व्यक्ति की श्रद्धा और परंपरा का विषय है; ज्योतिष इसे शुभ मुहूर्त के रूप में देखता है, परंतु किसी व्यक्ति-विशेष के जीवन में क्या घटित होगा, यह उसकी अपनी कुंडली और परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
तिथि कैसे निर्धारित होती है
हिंदू पर्वों की तिथियाँ पंचांग से निकाली जाती हैं। अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया को पड़ती है, और उसका ग्रेगोरियन (अंग्रेज़ी) दिनांक हर वर्ष पंचांग की गणना से तय होता है। इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ डेटाबेस से प्रदर्शित की जाती हैं।
ध्यान देने योग्य बात यह है कि एक ही तिथि अलग-अलग शहरों में एक दिन आगे-पीछे हो सकती है। इसका कारण यह है कि पर्व की तिथि किसी स्थान-विशेष पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य के राशि-प्रवेश के समय के अनुसार तय होती है। साथ ही, अमांत और पूर्णिमांत — इन दो पंचांग-पद्धतियों के अनुसार भी तिथि में अंतर दिख सकता है। इसलिए यदि किसी अन्य पंचांग में एक दिन का अंतर दिखे तो वह त्रुटि नहीं, बल्कि गणना-पद्धति का स्वाभाविक परिणाम है।
इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिरी अयनांश के आधार पर गणना की गई हैं। अपने निवास-स्थान के अनुसार सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना उचित रहता है।
पूजा विधि
अक्षय तृतीया की पूजा सामान्यतः सरल और श्रद्धा-केंद्रित होती है। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की उपासना इस दिन का मुख्य भाव है। परिवारों में जो विधि प्रचलित है, वह इस प्रकार हो सकती है:
- प्रातः स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा-स्थान की सफ़ाई करें।
- विष्णु और लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष दीपक प्रज्वलित करें।
- पुष्प, तुलसी, धूप और नैवेद्य अर्पित करें।
- विष्णु सहस्रनाम, लक्ष्मी स्तोत्र या अपने कुल-परंपरा के अनुसार मंत्र जप करें।
- दान का विशेष महत्व है — अन्न, वस्त्र अथवा अपनी सामर्थ्य के अनुसार किसी भी रूप में दान करें।
- अनेक श्रद्धालु इस दिन स्वर्ण क्रय करते हैं, जिसे शुभ माना जाता है। यह व्यक्तिगत श्रद्धा और परंपरा का विषय है।
पूजा का कोई एक अनिवार्य स्वरूप नहीं है। जो विधि आपके परिवार या क्षेत्र में प्रचलित हो, उसे ही श्रद्धापूर्वक निभाना पर्याप्त है।
क्षेत्रीय विविधताएँ
अक्षय तृतीया पूरे भारत में मनाई जाती है, परंतु इसके आचरण में क्षेत्रीय भिन्नताएँ देखने को मिलती हैं। कहीं यह मुख्यतः विष्णु-लक्ष्मी की उपासना का दिन है, तो कहीं इसे नए वस्त्र, आभूषण अथवा व्यापारिक आरंभ के शुभ अवसर के रूप में लिया जाता है। दान और पुण्य-कार्य का भाव सर्वत्र समान रहता है।
परंपराओं में स्मार्त और वैष्णव सम्प्रदायों के अनुसार भी कुछ अंतर दिख सकता है, और अमांत तथा पूर्णिमांत पद्धतियों में तिथि-गणना भिन्न हो सक
अक्षय तृतीया 2027 की तिथियाँ
- अक्षय तृतीया
- रविवार, 9 मई 2027वैशाख शुक्ल तृतीया (sunrise)
अक्षय तृतीया 2028 की तिथियाँ
- अक्षय तृतीया
- गुरुवार, 27 अप्रैल 2028वैशाख शुक्ल तृतीया (sunrise)
प्रश्न
अक्षय तृतीया 2027 में कब है?
अक्षय तृतीया रविवार, 9 मई 2027 (वैशाख शुक्ल तृतीया (sunrise)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।
अक्षय तृतीया कब है?
अक्षय तृतीया वैशाख शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।
अक्षय तृतीया कहाँ मनाया जाता है?
पूरे भारत में।
अलग-अलग पंचांगों में अक्षय तृतीया की तारीख़ क्यों बदल सकती है?
हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।
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