हिंदू त्योहार · Narak Chaturdashi
नरक चतुर्दशी
अगली तिथि शनिवार, 7 नवंबर 2026 · कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (pradosh)
| तिथि / समय | कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी |
|---|---|
| देवता | कृष्ण |
| पालन | छोटी दिवाली, अभ्यंग स्नान |
| कहाँ | पूरे भारत में |
नरक चतुर्दशी 2026 की तिथियाँ
- नरक चतुर्दशी
- शनिवार, 7 नवंबर 2026कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (pradosh)
स्विस एफेमेरिस (लाहिरी) से नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए गणना। दूसरे शहरों में, और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों में, तारीख़ एक दिन बदल सकती है।
नरक चतुर्दशी
नरक चतुर्दशी को कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी के दिन मनाया जाता है। यह पर्व भगवान कृष्ण से जुड़ा है और सम्पूर्ण भारत में मनाया जाता है। इसे छोटी दीपावली के रूप में भी जाना जाता है, और इस दिन अभ्यंग स्नान की परंपरा प्रचलित है। इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ पंचांग की गणना से प्राप्त होती हैं, और प्रत्येक वर्ष की ग्रेगोरियन तिथि यहीं सूचीबद्ध की जाती है।
महत्व और कथा
नरक चतुर्दशी का संबंध भगवान कृष्ण से माना जाता है। परंपरा में यह पर्व बुराई पर अच्छाई की विजय के स्मरण से जुड़ा है, और इसी कारण इसे नरक चतुर्दशी कहा जाता है। भक्त इस दिन कृष्ण की कृपा का स्मरण करते हैं और अपने जीवन से अंधकार तथा नकारात्मकता को दूर करने का संकल्प लेते हैं।
यह दिन छोटी दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है, जो दीपावली के उत्सव का एक महत्वपूर्ण अंग है। इस दिन अभ्यंग स्नान का विशेष महत्व बताया गया है — अर्थात् स्नान से पहले शरीर पर तेल लगाना और फिर स्नान करना। यह क्रिया शुद्धि और नवीनता का प्रतीक मानी जाती है। यह पर्व पूरे भारत में मनाया जाता है, और इसका स्वरूप हर क्षेत्र में अपनी स्थानीय परंपराओं के साथ ढल जाता है।
तिथि कैसे निर्धारित होती है
नरक चतुर्दशी की तिथि कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी से तय होती है। हिंदू पर्वों की तिथियाँ तिथि, नक्षत्र अथवा सूर्य के राशि प्रवेश के आधार पर निर्धारित की जाती हैं, और यह गणना स्थान के अनुसार होती है। इसी कारण एक ही पर्व अलग-अलग नगरों में एक दिन आगे-पीछे हो सकता है।
इसके अतिरिक्त, अमांत और पूर्णिमांत पंचांग पद्धतियों के कारण भी तिथि में अंतर देखा जाता है। इसलिए यदि किसी वर्ष किसी अन्य स्रोत पर भिन्न तिथि दिखे, तो यह त्रुटि नहीं, बल्कि गणना पद्धति और स्थान का अंतर है। इस पृष्ठ पर दी गई तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय तथा लाहिरी अयनांश के आधार पर परिकलित की जाती हैं। अपने नगर के लिए सटीक समय जानने के लिए स्थानीय पंचांग देखना उपयुक्त रहता है।
पूजा विधि
इस दिन की सामान्य विधि सरल और व्यावहारिक है। परंपरा के अनुसार निम्न क्रम अपनाया जाता है:
- प्रातःकाल स्नान से पूर्व शरीर पर तेल लगाना — यही अभ्यंग स्नान कहलाता है।
- स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण करना।
- भगवान कृष्ण का स्मरण, ध्यान अथवा उनके नाम का जप।
- दीप जलाना, जो अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है।
- घर के द्वार पर दीप रखने की परंपरा, जो छोटी दीपावली के स्वरूप से जुड़ी है।
पूजा का स्वरूप हर परिवार में भिन्न हो सकता है, और किसी विशेष मंत्र अथवा क्रम को अनिवार्य मानना आवश्यक नहीं है। श्रद्धा और शुद्ध भावना को ही प्रमुख माना जाता है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली अथवा व्यक्तिगत साधना से संबंधित प्रश्न हों, तो योग्य ज्योतिषी से परामर्श लेना उचित रहता है।
क्षेत्रीय भिन्नताएँ
नरक चतुर्दशी पूरे भारत में मनाई जाती है, परंतु इसका स्वरूप क्षेत्र-क्षेत्र पर बदलता है। कहीं इसे छोटी दीपावली के रूप में प्रमुखता मिलती है, तो कहीं अभ्यंग स्नान पर अधिक बल दिया जाता है। दीप जलाने का समय, स्नान का क्रम और पूजा की सामग्री में स्थानीय परंपराओं के अनुसार अंतर देखा जाता है।
स्मार्त और वैष्णव परंपराओं में भी कुछ भिन्नत
नरक चतुर्दशी 2027 की तिथियाँ
- नरक चतुर्दशी
- गुरुवार, 28 अक्टूबर 2027कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (pradosh)
नरक चतुर्दशी 2028 की तिथियाँ
- नरक चतुर्दशी
- सोमवार, 16 अक्टूबर 2028कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (pradosh)
प्रश्न
नरक चतुर्दशी 2026 में कब है?
नरक चतुर्दशी शनिवार, 7 नवंबर 2026 (कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी (pradosh)) को है; गणना नई दिल्ली के सूर्योदय के लिए।
नरक चतुर्दशी कब है?
नरक चतुर्दशी कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को मनाया जाता है; हर वर्ष की सटीक तारीख़ पंचांग से गणना करके इसी पृष्ठ पर दी जाती है।
नरक चतुर्दशी कहाँ मनाया जाता है?
पूरे भारत में।
अलग-अलग पंचांगों में नरक चतुर्दशी की तारीख़ क्यों बदल सकती है?
हिंदू त्योहार किसी स्थान पर तिथि, नक्षत्र या सूर्य संक्रांति से तय होते हैं, इसलिए शहरों के बीच और अमांत व पूर्णिमांत पंचांगों के बीच एक दिन का अंतर हो सकता है। यहाँ तिथियाँ नई दिल्ली के सूर्योदय और लाहिरी अयनांश से हैं।
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